Monday, 6 March 2017

अब्दुल कलाम

ए. पी. जे. अब्दुल कला
अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम अथवा ए. पी. जे. अब्दुल कलाजिन्हें मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता (इंजीनियर) के रूप में विख्यात थे। इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाने लगा।

प्रारंभिक जीवन :
अवुल पकिर जैनुलअबिदीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक मुसलमान परिवार मैं हुआ। उनके पिता जैनुलअबिदीन एक नाविक थे और उनकी माता अशिअम्मा एक गृहणी थीं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थे इसलिए उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा। अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए बालक कलाम स्कूल के बाद समाचार पत्र वितरण का कार्य करते थे। अपने स्कूल के दिनों में कलाम पढाई-लिखाई में सामान्य थे पर नयी चीज़ सीखने के लिए हमेशा तत्पर और तैयार रहते थे। उनके अन्दर सीखने की भूख थी और वो पढाई पर घंटो ध्यान देते थे। उन्होंने अपनी स्कूल की पढाई रामनाथपुरम स्च्वार्त्ज़ मैट्रिकुलेशन स्कूल से पूरी की और उसके बाद तिरूचिरापल्ली के सेंट जोसेफ्स कॉलेज में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने सन 1954 में भौतिक विज्ञान में स्नातक किया। उसके बाद वर्ष 1955 में वो मद्रास चले गए जहाँ से उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1960 में कलाम ने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की।

करियर की शुरुवात:
1958 में कलाम जी D.T.D. and P. में तकनिकी केंद्र में वरिष्ट वैज्ञानिक के रूप कार्य करने लगे| यहाँ रहते हुए ही इन्होंने prototype hover craft के लिए तैयार वैज्ञानिक team का नेतृत्व किया| career की शुरुवात में ही अब्दुल कलामजी ने इंडियन आर्मी के लिए एक स्माल हेलीकाप्टर डिजाईन किया| 1962 में अब्दुल कलामजी रक्षा अनुसन्धान को छोड़ भारत के अन्तरिक्ष अनुसन्धान में कार्य करने लगे| 1962 से 82 के बीच वे इस अनुसन्धान से जुड़े कई पदों पर कार्यरत रहे| 1969 A.P.J. Abdul कलामजी ISRO में भारत के पहले SLV-3 (Rohini) के समय प्रोजेक्ट हेड बने|

राष्ट्रपति :

कलाम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों के समर्थन के साथ 2002 में भारत के राष्ट्रपति चुने गए। पांच वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा के अपने नागरिक जीवन में लौट आए। इन्होंने भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किये।

सम्‍मान :

v  2014 - डॉक्टर ऑफ़ साइन्स - एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम
v  2012- डॉक्टर ऑफ़ लॉज़(मानद उपाधि) - साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय
v  2011  - आइ॰ई॰ई॰ई॰ मानद सदस्यता -आइ॰ई॰ई॰ई॰
v  2010 -डॉक्टर ऑफ इन्जीनियरिंग - यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाटरलू
v  2009 - मानद डॉक्टरेट - ऑकलैंड विश्वविद्यालय
v  2009 - हूवर मेडल - ए॰एस॰एम॰ई॰ फाउण्डेशन,
v  2009 - वॉन कार्मन विंग्स अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड - कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी,
v  2008 - डॉक्टर ऑफ इन्जीनियरिंग (मानद उपाधि) - नानयांग टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय, सिंगापुर
v  2008 - डॉक्टर ऑफ साइन्स (मानद उपाधि) - अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
v  2007 - डॉक्टर ऑफ साइन्स एण्ड टेक्नोलॉजी की मानद उपाधि - कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय
v  2007 - किंग चार्ल्स II मेडल - रॉयल सोसायटी, यूनाइटेड किंगडम
v  2007 - डॉक्टर ऑफ साइन्स की मानद उपाधि -वूल्वरहैंप्टन विश्वविद्यालय, यूनाईटेड किंगडम
v  2000 - रामानुजन पुरस्कार - अल्वार्स शोध संस्थान, चेन्नई
v  1998 - वीर सावरकर पुरस्कार - भारत सरकार
v  1997 - इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार - भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस
v  1997 - भारत रत्न - भारत सरकार
v  1994 - विशिष्ट शोधार्थी - इंस्टीट्यूट ऑफ़ डायरेक्टर्स (इण्डिया)
v  1990 - पद्म विभूषण - भारत सरकार
v  1981 - पद्म भूषण - भारत सरकार

DRDO में कार्यकाल :
अपनी शिक्षा के पश्चात् ही वे DRDO से विज्ञानिक के रूप में जुड़े और शुरुवात में उन्होंने छोटे हेलीकाप्टर डिजाईन कारने में अपना अहम् योगदान दिया। अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति (Indian National Committee for Space Research – INCOSPAR) का हिस्सा होने के कारन उनको भारत के महान वैज्ञानिक जैसे विक्रम अम्बलाल साराभाई (Vikram Ambalal Sarabhai) जैसे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला।

ISRO मैं कार्यकाल :
1969 में उन्हें ISRO भेज दिया गया जहाँ उन्होंने परियोजना निदेशक (Project Director) के पद पर काम किया। उन्होंने पहला उपग्रह प्रक्षेपण यान (Satellite Launch Vehicle – SLV III) और ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (Polar Satellite Launch Vehicle -PSLV) को बनाने में अपना अहम् योगदान दिया जिनका प्रक्षेपण बाद में सफल हुआ।

उन्होंने बहुत सारी प्रेरणादायक किताबें लिखी जैसे “इंडिया 2020, इग्नाइटेड माइन्ड्स, मिशन इंडिया, द ल्यूमिनस स्पार्क, इंस्पायरिंग थॉट्स आदि। डॉ कलाम ने देश में भ्रष्टाचार को मिटाने के लिये “वॉट कैन आई गिव मूवमेंट नाम से युवाओं के लिये एक मिशन की शुरुआत की। देश (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद और इंदौर, आदि) के विभिन्न इंस्टीट्यूट और विश्वविद्यालयों में उन्होंने अतिथि प्रोफेसर के रुप में अपनी सेवा दी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी तिरुअनन्तपुरम् में चांसलर के रुप में, जेएसएस यूनिवर्सिटी (मैसूर), एयरोस्पेस इंजीनियरिंग ऐट अन्ना यूनिवर्सिटी (चेन्नई) आदि। उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मान से नवाज़ा गया जैसे पद्म भूषण, पद्म विभूषण, भारत रत्न, इंदिरा गांधी अवार्ड, वीर सावरकर अवार्ड, रामानुजन अवार्ड आदि।

अनमोल विचार :
v  आपके सपने सच होने से पहले आपको सपने देखने होंगे
v  आसमान की ओर देखो हम अकेले नहीं हैं, जो लोग सपने देखते हैं और कठिन मेहनत करते हैं, पूरा ब्रह्माण्ड उनके साथ है
v  अगर कोई देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो और सारे लोग अच्छी शुद्ध मानसिकता वाले हों, मैं दावे से कह सकता हूँ केवल 3 लोग ही ऐसे देश का निर्माण कर सकते हैं- माता, पिता और गुरु
v  महान सपने देखने वाले महान लोगों के सपने हमेशा पूरे होते हैं
v  भगवान, जिन्होंने हमें बनाया है, वो हमारे मन और व्यक्तित्व में वास करते हैं और हमें शक्ति प्रदान करते हैं और प्रार्थना इस शक्ति को बढाती है
v  युवाओं को मेरा सन्देश है कि अलग तरीके से सोचें, कुछ नया करने का प्रयत्न करें, अपना रास्ता खुद बनायें, असंभव को हासिल करें
v  हमें त्याग करना होगा ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी समृद्ध हो
v  अपने कार्य में सफल होने के लिए आपको एकाग्रचित होकर अपने लक्ष्य पर ध्यान लगाना होगा
v  रचनात्मकता भविष्य में सफलता की कुंजी है, प्राथमिक शिक्षा ही वह साधन है जो बच्चों में सकारात्मकता लाती है
v  जब तक पूरा भारत उठ कर खड़ा नहीं होगा, संसार में कोई हमारा आदर नहीं करेगा। इस दुनियाँ में डर की कोई जगह नहीं है केवल शक्ति की पूजा होती है
मृत्यु :
27 जुलाई 2015 को ये मिसाइल मैन हम सब को छोड़ कर चले गए तथा उनका जाना हमारे देश के लिए कभी पूर्ण न होने वाली क्षति थी | कलाम साहब की मृत्यु की वजह दिल का दौरा था | यह उस वक़्त हुआ जब वह शिलोंग के भारतीय प्रबंधन संस्थान में एक व्याख्यान दे रहे थे |